Saturday, 15 October 2016

क्या,भारत में चुनावी प्रक्रिया बदलनी चाहिए

     
          
          
  
   चुनाव हो अमेरिका की तर्ज पर,नेता का चुनाव हो टीवी पर,प्रचार और  भीड़ से करे तोबा  
                 
      हेल्लो इंडिया, जब हम हर चीज समय के मुताबिक बदलते हैं जैसे,लैंड लाइन फ़ोन की जगह मोबाइल आ गया,खानपान,रहन सहन,तोर तरीके सब बदले हैं तो फिर क्यों नहीं,भारत भी अमेरिका की तरह चुनाव करे,अमेरिका में बड़ी बड़ी चुनावी रैलीया नहीं की जाती,केवल टीवी चैनल पर सभी चुनावी उम्मीद वारो,की चुनावी घोषनाओ को टीवी पर दिखाया जाये और जनता उनको सुन कर,बिना घरो से निकले और अपना दिन और धन खर्च किये अपने घरो से ही चुनाव विशेष के टोल फ्री नंबर्स मेसेज द्वारा अपना वोट कास्ट कर दे.
  इसके फायदे  यह होगे की नेताओ का तो कुछ बिगड़ता नहीं लेकिन जनता को इलेक्शन के दिनों में काफी उठा पटको का सामना करना पड़ता हैं,जनता को अपने अपने काम काज छोड़कर अपने चुनावी एरिया में जाना पड़ता हैं,जिसका खर्चा जनता को उठाना पड़ता हैं और, जनता को आने और जाने में,बच्चो की पढ़ाई ख़राब होती हैं,आने जाने और देश में छुटी करने की जरुरत नहीं,क्यों की वोट देने में सिर्फ दो मिनट लगते हैं लेकिन,वोटर्स को दो दो ,तीन तीन दिन ख़राब करने पड़ते हैं,अगर अमेरिका की तर्ज पर चुनाव होते हैं तो लाखो करोडो का खर्चा देश की आर्थिक कमजोरी बन जाएगी देश की मजबूती,देश होगा आर्थिक मजबूत.
   1. अगर किसी के घर पैर टीवी नहीं हैं,तो सरकार को कस्बो और गावो में पंचायत स्तर पर टीवी लगाकर जनता को वोट के लिए बताया जा सकता हैं.सभी पंचायतो में बड़ी स्क्रीन की टीवी अनिवार्य करदे जिससे गावो के लोग टीवी देख सकते हैं और स्टूडियो से नेता जी द्वारा किये प्रचार को गाव और देश दुनिया सुन और देख सके.वोट वाले दिन एक फ्री SMS सुविधा देनी चाहिए जिससे वोटर अपना वोट SMS के जरिये भेज सके.  
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विशेष :
   यह आईडिया ZEE न्यूज़ के प्रोग्राम DNA में एंकर सुधीर चोधरी ब्रिफ्फ़ कर चुके.जिसका प्रोग्राम 15 ओक्टोम्बेर २०१६ की शाम 8 बजे को प्रोग्राम में दिया हैं.अर्थात मेरे मेरा निजी विचार नहीं हैं.मेने तो इन विचारो को जनता के सामने लेन के लिए ब्लॉग पर डाला हैं और आगे देश के विकाश की कोई भी नयी योजना या आईडिया भी इस ब्लॉग पर पढ़ सकेंगे.
                          जय हिन्द 
                                          मोती सिंह राठौर 
                                             लेखक


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